आज उत्तरप्रदेश की यात्रा के दौरान राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT) द्वारा डिजाइन की गई विशेष मोबाइल पुस्तकालय बस “पुस्तक परिक्रमा” के लोकार्पण का अवसर मिला ।
आज उत्तरप्रदेश की यात्रा के दौरान राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT) द्वारा डिजाइन की गई विशेष मोबाइल पुस्तकालय बस “पुस्तक परिक्रमा” के लोकार्पण का अवसर मिला ।
यह अभिनव पहल साहित्य, कहानी-वाचन और संवाद के माध्यम से ग्रामीण एवं अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरणीय चेतना और जिम्मेदारी का प्रसार करेगी।
“पुस्तक परिक्रमा” न केवल ज्ञान की रोशनी को दूर-दराज़ तक पहुँचाएगी, बल्कि हर पीढ़ी में प्रकृति के प्रति संवेदनशील सोच और संरक्षण का संस्कार भी रोपित करेगी।
आज उत्तर प्रदेश के बसी घाट पर माँ गंगा की स्वच्छता और संरक्षण के उद्देश्य से प्रस्तुत एक सशक्त नुक्कड़ नाटक को देखने का अवसर मिला।
आज उत्तर प्रदेश के बसी घाट पर माँ गंगा की स्वच्छता और संरक्षण के उद्देश्य से प्रस्तुत एक सशक्त नुक्कड़ नाटक को देखने का अवसर मिला।
नुक्कड़ नाटक भारतीय जनमानस तक पहुँचने का एक जीवंत, लोकसंवेदी और अत्यंत प्रभावशाली माध्यम है।
जब कलाकार लोकभाषा और सांस्कृतिक शैली में जल संरक्षण, स्वच्छता और गंगा के प्रति आस्था जैसे विषयों को मंचित करते हैं, तो वे न केवल दृश्य अनुभव रचते हैं, बल्कि जनचेतना की अलख भी जगाते हैं।
आज उत्तर प्रदेश की यात्रा के दौरान गंगामूर्ति वाटिका में माँ गंगा के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
आज उत्तर प्रदेश की यात्रा के दौरान गंगामूर्ति वाटिका में माँ गंगा के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
गंगामूर्ति वाटिका मात्र एक उद्यान नहीं, बल्कि माँ गंगा की महिमा, भारतीय संस्कृति की गहराई और जनआस्था की अखंड धारा का सजीव प्रतीक है। यह पवित्र स्थल गंगा की पुण्यधारा, उनकी जीवनदायिनी शक्ति और करोड़ों भारतीयों की श्रद्धा को मूर्त रूप में प्रकट करता है।
आज विश्व पर्यावरण दिवस पर उत्तरप्रदेश के गंगामूर्ति वाटिका में वृक्षारोपण कर “एक पेड़ माँ के नाम” संकल्प के तहत एक पेड़ अपनी मातृश्री को समर्पित किया।
इस पुनीत कार्य के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रभाई मोदी सर का भी स्मरण किया, उन्हों ने इस अभियान के माध्यम से मातृत्व और प्रकृति को जोड़ने वाली एक नई चेतना को जन्म दिया है।
आज उत्तर प्रदेश के नरौरा में नमामि गंगे एवं WII द्वारा संचालित ‘कछुआ बचाव एवं पुनर्वास केंद्र’ के अवलोकन का अवसर मिला।
आज उत्तर प्रदेश के नरौरा में नमामि गंगे एवं WII द्वारा संचालित ‘कछुआ बचाव एवं पुनर्वास केंद्र’ के अवलोकन का अवसर मिला।
यह केंद्र गंगा नदी की पारिस्थितिकी और जैवविविधता की रक्षा हेतु भारत सरकार के संकल्प का एक सजीव प्रमाण है।
गंगा में पाई जाने वाली 14 प्रजातियों में से 6 प्रजातियों के कछुओं को यहाँ संरक्षित किया जाता है।
मछुआरों के जाल में फँसकर घायल हुए कछुओं का यहाँ उपचार, देखभाल और पुनर्वास किया जाता है। स्वस्थ होने के बाद उन्हें फिर से माँ गंगा की गोद में लौटाया जाता है।
आज कछुओं को भोजन कराया, और भावनात्मक जुड़ाव से तीन कछुओं के नाम रखे:
सिंदूर – जिसका एक पैर नहीं है, पर साहस और जीवन के प्रति उसकी जिजीविषा प्रेरक है।
शक्ति – जो तेज़, जीवंत और सतर्क है।
जलज – जो गंगा की तरह शांत और निर्मल है।
सिंदूर अब इस केंद्र की विशेष निगरानी में रहेगा।
इस अनुभव ने यह स्मरण कराया कि नदी सिर्फ जलधारा नहीं, संस्कृतिधारा है और माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi सर के नेतृत्व में ‘नमामि गंगे’ जैसे अभियान इस अमूल्य धरोहर की रक्षा में क्रांतिकारी भूमिका निभा रहे हैं।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रभाई मोदी सर ने देशभर में “जनभागीदारी से जल संरक्षण” का आह्वान किया है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रभाई मोदी सर ने देशभर में “जनभागीदारी से जल संरक्षण” का आह्वान किया है। इस आह्वान को आत्मसात करते हुए झगड़िया स्थित बोरोसिल कंपनी ने पूरे देश में 1000 बोरवेल खुदवाने का संकल्प लिया। कंपनी ने अपने डीलरों के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में 4000 अतिरिक्त बोरवेल करवाने की जिम्मेदारी भी ली है। आज अनुमानित 15 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले जल संरक्षण कार्यों का लोकार्पण करते हुए अत्यंत संतोष और गर्व की अनुभूति हुई।
बोरोसिल के चेयरमैन श्री पी. के. खेरूका जी, उनकी पूरी टीम और सभी डीलरों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई देता हूँ ! एक कंपनी ने इस जिम्मेदारी को अपना कर्तव्य समझकर निभाया है, यह पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।
आज गभेनी गांव के आशापुरा माता मंदिर प्रांगण में जल संरक्षण एवं जनभागीदारी
आज गभेनी गांव के आशापुरा माता मंदिर प्रांगण में जल संरक्षण एवं जनभागीदारी अभियान के अंतर्गत लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होकर गर्व और आत्मसंतोष की अनुभूति हुई।
सचिन इंफ्रा एनवायरमेंट द्वारा जल संचयन को लेकर किया गया यह प्रयास सराहनीय है। यह पहल न केवल स्थानीय स्तर पर जल सुरक्षा को मजबूती देगी, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी सर के नेतृत्व में चल रहे ‘जन भागीदारी से जल संचय” अभियान को भी ऊर्जा प्रदान करेगी।
देशभर में जो जिले भूजल संकट का सामना कर रहे हैं, उन्हें जल संपन्न बनाने का हमारा संकल्प अडिग है।
मैं सभी किसानों से अपील करता हूं कि वे अपने खेतों में बोरवेल के माध्यम से रिचार्ज की व्यवस्था करें, ताकि वर्षा जल सीधे भूमि में समा सके।हर नागरिक का यह दायित्व है कि वह जल संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाए।
Privileged to articulate the vision and priorities of the Ministry of Jal Shakti at the inaugural Powering Bharat Summit,
Privileged to articulate the vision and priorities of the Ministry of Jal Shakti at the inaugural Powering Bharat Summit, hosted by Network18 and Moneycontrol, a distinguished forum reflecting India’s resolve for a self-reliant and water-secure future.
Under the visionary leadership of Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi Sir, India’s water policy is guided by a clear and unwavering principle “Blood and water cannot flow together.” This is no longer just a statement, it is the cornerstone of our water diplomacy.
The decision to place the Indus Waters Treaty in abeyance is rooted in the conviction that when a neighbouring country sponsors terrorism, water-sharing cannot continue.
एक दौड़ सिर्फ फिटनेस के लिए नहीं पर पानी की एक-एक बूँद के लिए भी…
एक दौड़ सिर्फ फिटनेस के लिए नहीं पर पानी की एक-एक बूँद के लिए भी…
आज रोटरी क्लब ऑफ़ सूरत ईस्ट द्वारा आयोजित रोटरी मैराथन 2025 में उपस्थित रह कर आनंद की अनुभूति हुई। यह केवल एक मैराथन नहीं थी, यह “कैच द रेन” का जन आंदोलन था ।
जन-जन की भागीदारी यह सन्देश स्पष्ट कर रही है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रभाई मोदी सर के नेतृत्व में विकसित भारत की नींव जल सुरक्षा है।
मैं ग्रीन लैब डायमंड्स के श्री मुकेशभाई पटेल एवं आयोजकों को साधुवाद देता हूँ, जिन्होंने जल संरक्षण जैसे गंभीर विषय को जन उत्सव का रूप दिया, और जनचेतना को जनशक्ति में बदला।
સુરતમાં 1924ની સાલમાં સ્વામી આત્માનંદ સરસ્વતીજીએ શરૂ કરેલી શ્રી તાપી બ્રમ્હચર્યાશ્રમ
સુરતમાં 1924ની સાલમાં સ્વામી આત્માનંદ સરસ્વતીજીએ શરૂ કરેલી શ્રી તાપી બ્રમ્હચર્યાશ્રમ સભાનાં શતાબ્દી મહોત્સવમાં ઉપસ્થિત રહી આનંદની લાગણી અનુભવી.
એક સંસ્થા જ્યારે એનું શતાબ્દી વર્ષ ઉજવતી હોય ત્યારે એનાં પાયામાં સંસ્કાર અને સાતત્ય રહેલા હોય છે. સંસ્થાનાં સૌ હોદ્દેદારશ્રીઓ અને ટ્રસ્ટી મંડળને ખૂબ ખૂબ અભિનંદન અને શુભેચ્છાઓ પાઠવ્યા !